भारतीय जनता पार्टी ने 17 अगस्त 2026 को अपनी नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा की, जिसमें पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में कई वरिष्ठ और युवा नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं। और यह उनके कार्यकाल की पहली बड़ी संगठनात्मक नियुक्ति सूची है। यह सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। इस बड़े फेरबदल में उत्तराखंड से जुड़े चार प्रमुख नेताओं तीरथ सिंह रावत, अनिल बलूनी, आलोक भट्ट और महेंद्र पांडे को अहम पद सौंपे गए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत बने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को भाजपा ने अपना राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। इस सूची में उनके साथ वसुंधरा राजे सिंधिया, राम माधव, बैजयंत जय पांडा, डी. पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, भारती प्रवीण पवार, मनप्रीत सिंह बादल, वर्षा बेन नरेंद्रभाई दोशी, लाल सिंह आर्य, एम. नागराजा, तारिक मंसूर और मधुचंदा कर सहित कुल तेरह नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
तीरथ सिंह रावत का जन्म 9 अप्रैल 1964 को पौड़ी गढ़वाल में हुआ था। वे 10 मार्च 2021 से 1 जुलाई 2021 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे और उनके बाद पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की कमान संभाली थी। इससे पहले वे 2019 से 2024 तक गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद रहे, 2012 से 2017 तक चौबट्टाखाल विधानसभा सीट से विधायक रहे, वर्ष 2000-2002 में उत्तराखंड के पहले शिक्षा मंत्री रहे और 2013 से 2015 तक उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
अनिल बलूनी को मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी
गढ़वाल लोकसभा सीट से वर्तमान सांसद अनिल बलूनी को पार्टी ने अपना राष्ट्रीय मीडिया संयोजक नियुक्त किया है। इस जिम्मेदारी में उनके साथ सह-संयोजक के रूप में आशीष उषा अग्रवाल, प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को शामिल किया गया है।
अनिल बलूनी का जन्म 2 दिसंबर 1970 को पौड़ी गढ़वाल में हुआ था और उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। वे सितंबर 2020 से भाजपा के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे अप्रैल 2018 से अप्रैल 2024 तक राज्यसभा के सदस्य रहे और जून 2024 के लोकसभा चुनाव में गढ़वाल सीट से जीत दर्ज कर संसद पहुंचे, जहां उन्होंने तीरथ सिंह रावत का ही स्थान लिया था।
अनिल बलूनी का जन्म 2 दिसंबर 1970 को पौड़ी गढ़वाल में हुआ था और उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। वे सितंबर 2020 से भाजपा के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे अप्रैल 2018 से अप्रैल 2024 तक राज्यसभा के सदस्य रहे और जून 2024 के लोकसभा चुनाव में गढ़वाल सीट से जीत दर्ज कर संसद पहुंचे, जहां उन्होंने तीरथ सिंह रावत का ही स्थान लिया था।
आलोक भट्ट को सोशल मीडिया सह-संयोजक का दायित्व
पार्टी ने अपनी डिजिटल और सोशल मीडिया रणनीति को नई दिशा देने के लिए भी बड़ा बदलाव किया है। दीपक म्हस्के को नया राष्ट्रीय सोशल मीडिया संयोजक बनाया गया है, जिन्होंने इस भूमिका में अमित मालवीय का स्थान लिया है। इसी टीम में उत्तराखंड के आलोक भट्ट को सोशल मीडिया सह-संयोजक नियुक्त किया गया है। उनके साथ प्रीति गांधी, शिवानंद द्विवेदी और अरुण यादव को भी यही जिम्मेदारी सौंपी गई है।
महेंद्र पांडे बने राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री
उत्तराखंड से ही एक और महत्वपूर्ण नाम इस सूची में शामिल है महेंद्र पांडे, जिन्हें पार्टी ने राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री नियुक्त किया है। इस जिम्मेदारी में उनके साथ तरुण चुघ को राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी के तौर पर बनाए रखा गया है। महेन्द्र पांडे की इस नियुक्ति को राज्य इकाई के लिए एक और सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
संगठन में अन्य प्रमुख नियुक्तियां
इसी पुनर्गठन के तहत पार्टी ने केंद्रीय स्तर पर कई अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी सौंपी हैं। स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है, जबकि पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष का दायित्व दिया गया है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए संबित पात्रा को समन्वयक और राजीव बब्बर को सह-समन्वयक नियुक्त किया गया है। इसके अलावा विनोद तावड़े, सुनील बंसल, बिप्लब कुमार देब, सतीश पूनिया, गजेंद्र पटेल, हरीश द्विवेदी और संजय भाटिया को भी राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर जिम्मेदारी दी गई है। संगठन महासचिव के तौर पर बी.एल. संतोष को बरकरार रखा गया है जबकि शिव प्रकाश और सौदान सिंह उनके साथ संयुक्त महासचिव के रूप में काम करेंगे।
निष्कर्ष
भाजपा का यह नया संगठनात्मक ढांचा अनुभवी और युवा नेतृत्व के मेल पर आधारित नजर आता है। तीरथ सिंह रावत का प्रशासनिक अनुभव, अनिल बलूनी की मीडिया रणनीति में विशेषज्ञता, आलोक भट्ट की डिजिटल मोर्चे पर सक्रियता और महेंद्र पांडे की संगठनात्मक कार्यप्रणाली में दक्षता, ये चारों मिलकर आने वाले समय में पार्टी के संगठनात्मक और चुनावी अभियानों को नई गति देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
