ब्रजेश पाठक बने सरकार और आरक्षण विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच सेतु

21 अगस्त 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर "आरक्षण हटाओ आंदोलन" के समर्थन में हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे थे। इस प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच स्थल को लेकर विवाद भी हुआ था और सुरक्षा बलों को तैनात करना पड़ा था। इसी घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने आंदोलन से जुड़े छात्रों और केंद्र सरकार के बीच सेतु की भूमिका निभाते हुए बातचीत की पहल की।

up deputy chief minister brijesh pathak hold a joint press conference with the protesters protesting against reservation
Deputy chief minister brijesh pathak 

उत्तरप्रदेश के हज़रतगंज में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस

लखनऊ के हज़रतगंज में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने आंदोलन से जुड़े छात्रों के साथ मीडिया को संबोधित किया। इस मौके पर आंदोलन से जुड़े हर्ष दुबे, मृत्युंजय पाठक और शिवा शर्मा भी मौजूद रहे।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का बयान

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ब्रजेश पाठक ने बताया कि जंतर-मंतर पर हुए धरना-प्रदर्शन के दौरान छात्रों की ओर से एक पत्र प्राप्त हुआ था जिसे उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि प्रदर्शन से जुड़े विषयों पर कार्रवाई की जाएगी और आने वाले दो दिनों में एक केंद्रीय मंत्री के साथ इस मुद्दे पर बैठक भी प्रस्तावित है। इस तरह उप मुख्यमंत्री ने खुद को छात्रों की मांगों को शीर्ष स्तर तक पहुंचाने वाले माध्यम के रूप में पेश किया।

प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रतिक्रिया

आंदोलन से जुड़े हर्ष दुबे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि छात्र जंतर-मंतर पर पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से अपना प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उन्हें आश्वासन मिला है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। हर्ष दुबे ने यह भी स्पष्ट किया कि दो दिन बाद केंद्रीय मंत्री के साथ प्रस्तावित बैठक के बाद छात्र एक बार फिर मीडिया के सामने अपनी बात रखेंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

मांग-पत्र में छात्रों की क्या मांगें हैं 

छात्रों की ओर से सौंपे गए मांग-पत्र में मौजूदा शिक्षा और आरक्षण व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए थे। पत्र में कहा गया कि विद्यार्थियों के बीच किसी भी प्रकार का ऊंच-नीच या भेदभाव नहीं होना चाहिए और सभी को समान अवसर तथा समान व्यवहार मिलना चाहिए ताकि हर छात्र का समुचित कल्याण सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा पत्र में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान घटित घटनाक्रम छात्रों की मुख्य मांगों और प्रदर्शनकारियों के साथ हुए व्यवहार से जुड़े मुद्दों को भी विस्तार से रखा गया था।

आगे की राह

ब्रजेश पाठक ने भरोसा दिलाया कि यह मांग-पत्र केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा दिया गया है और वे स्वयं छात्रों की केंद्रीय स्तर पर बातचीत सुनिश्चित कराने का प्रयास करेंगे। यह पहल इस बात का संकेत है कि जो आंदोलन शुरुआत में एक इंस्टाग्राम पेज और सड़क पर हुए विरोध-प्रदर्शन तक सीमित था वह अब राजनीतिक स्तर पर भी सुना जाने लगा है। आने वाले दिनों में केंद्रीय मंत्री के साथ प्रस्तावित बैठक के नतीजे यह तय करेंगे कि आंदोलन की मांगों पर सरकार की ओर से क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

निष्कर्ष

ब्रजेश पाठक की यह भूमिका दिखाती है कि किस तरह एक राज्य स्तर के नेता ने छात्रों और केंद्र सरकार के बीच संवाद कायम कराने की जिम्मेदारी ली। हालांकि अभी तक इस मुद्दे पर कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है लेकिन इतना तय है कि "आरक्षण हटाओ आंदोलन" अब केवल सड़कों तक सीमित न रहकर सरकार की नीति-निर्माण प्रक्रिया के दायरे में भी चर्चा का विषय बन चुका है।

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