अलफ्रेड नोबेल
नमस्कार दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम विश्व के सबसे बड़े केमिस्ट अलफ्रेड नोबेल का जीवन परिचय जानेंगे।
एक रोज इस केमिस्ट को अपनी मृत्यु की खबर एक न्यूज़ पेपर से पता चलती है और बाद में न्यूज़ पेपर एजेंसी द्वारा यह सफाई दी जाती है कि यह एक गलती है जो उनसे गलती से हुआ है।
इस केमिस्ट को इस बात से इतना बुरा नहीं लगता कि यह एक गलती है बल्कि इस बात से लगता है कि जिस शब्दावली का प्रयोग उस केमिस्ट में उस न्यूज़ पेपर एजेंसी द्वारा किया गया था वह उस केमिस्ट को दुखी करने वाला था उस न्यूज़ पेपर में लिखा गया था की मौत के सौदागर की मृत्यु। मौत के व्यापारी की मृत्यु।
अपने लिए प्रयोग इन शब्दों को सुनकर वह केमिस्ट सोचता है कि उसने अपना पूरा जीवन जिस देश को समर्पित किया और आज नहीं तो कल उसकी भी मृत्यु होगी और क्या उसकी मृत्यु के बाद दुनिया उसे मौत का सौदागर कहकर याद रखेगी यह सब सोचकर वह निश्चय करता है कि दुनिया मुझे ऐसे याद रखें मैं ऐसा नहीं बनना चाहता हूं और उसने उसी दिन से निश्चय किया कि मुझे अब शांति के क्षेत्र में कार्य करना चाहिए और उसने उसी दिन से शांति के क्षेत्र में कार्य करना शुरू कर दिया ।
इनके द्वारा ही विश्व के सबसे बड़े पुरस्कार नोबेल प्राइज तथा डायनामाइट का आविष्कार किया गया था।
आइए सबसे पहले उनके बचपन के बारे में जानते हैं।
बचपन
अल्फ्रेड नोबेल का आयोजन 21 अक्टूबर 1833 को स्वीडन के एक शहर स्टॉकहोम हुआ था । इनके पिता का नाम इमानुएल नोबेल था और माता का नाम कैरोलिन था इनके पिता भी एक बहुत बड़े व्यापारी थे
अल्फ्रेड नोबेल बचपन से ही बहुत बुद्धिमान व जिज्ञासु प्रवृत्ति के थे और इसी कारण केवल 17 साल की उम्र में उन्होंने इंग्लिश फ्रेंच जर्मन जैसी भाषाओं पर बहुत अच्छी पकड़ बना ली और इन भाषाओं को बहुत अच्छे से बोल भी सकते थे ।
अल्फ्रेड नोबेल बचपन से ही बहुत बुद्धिमान व जिज्ञासु प्रवृत्ति के थे और इसी कारण केवल 17 साल की उम्र में उन्होंने इंग्लिश फ्रेंच जर्मन जैसी भाषाओं पर बहुत अच्छी पकड़ बना ली और इन भाषाओं को बहुत अच्छे से बोल भी सकते थे ।
अल्फ्रेड ने घर पर रहकर इन फिजिक्स केमिस्ट्री लिटरेचर इकोनॉमिक्स जैसे सब्जेक्ट ओं का अध्ययन किया इसी दौरान उन्होंने केमिस्ट्री में अपनी बहुत अच्छी पकड़ बना ली अल्फ्रेड नोबेल की पिता की यही चाहते थे कि उनका बेटा एक केमिकल इंजीनियर बने केमिकल इंजीनियर बनाने के लिए उनके पिता ने उन्हें फ्रांस के एक शहर पेरिस भेज दिया जहां पर उनकी मुलाकात एक अन्य केमिस्ट आरकानियो सुबरैरो से होती है।
जिन्होंने कुछ साल पहले ही नाइट्रोग्लिसरीन नामक विस्फोटक का आविष्कार किया था नाइट्रोग्लिसरीन की एक कमी या आप कह लीजिए की एक सबसे बड़ी कमी यह थी कि इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जा पाना संभव नहीं था क्योंकि नाइट्रोग्लिसरीन एक द्रव पदार्थ है और यह एक जगह से दूसरी जगह ले जाने पर विस्फोट कर जाता है केवल कुछ निश्चित परिस्थितियों में ही इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जा पाना संभव हो पाता है।
अल्फ्रेड नोबेल का रिसर्च वर्क
अल्फ्रेड नोबेल ने नाइट्रोग्लिसरीन की इस कमी को दूर करने के लिए इस पर सर्च करना शुरू कर दिया और कई वर्षों तक वे इस पर सर्च करते रहे साल 1964 में नाइट्रोग्लिसरीन पर प्रयोग करने के दौरान लैब में नाइट्रोग्लिसरीन ब्लास्ट कर जाता है और अल्फ्रेड नोबेल के छोटे भाई और कुछ मजदूरों की मृत्यु इस ब्लास्ट में हो जाती है ।
यह समय अल्फ्रेड नोबेल व उनके परिवार के लिए दुख भरा था क्योंकि उन्होंने अपना छोटा भाई हुआ था पर अल्फ्रेड नोबेल ने हार न मानते हुए अपने रिसर्च वर्क को जारी रखा और साल 1966 में आखिरकार उन्हें कामयाबी मिली अल्फ्रेड नोबेल ने बताया कि यदि नाइट्रोग्लिसरीन में सिलिका मिला दी जाए तो यह पेस्ट का रूप ले लेता है और ब्लास्ट भी नहीं करता अर्थात इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जा पाना संभव है।
नाइट्रोग्लिसरीन पर इतनी बड़ी कामयाबी के बाद साल 1967 में उन्होंने डायनामाइट नाम से पेटेंट रजिस्टर करवाया और इसी के बाद वे डायनामाइट के आविष्कारक कहलाए डायनामाइट का जहां दुनिया ने एक और सकारात्मक प्रभाव देखा वही दुनिया ने इसका नकारात्मक प्रभाव भी देखा यदि हम सकारात्मक प्रभाव की बात करें तो सड़क निर्माण सुरंगों के निर्माण चट्टानों को ध्वस्त करना। आदि क्षेत्रों में इस के सागर में प्रभाव देखी गई जहां पर कुछ मिनटों में ही यह काम आसानी से किए जा सकते थे वही हम इसके नकारात्मक प्रभावों की बात करें तो इसका उपयोग व्यापक स्तर पर युद्ध क्षेत्र में किया जाने लगा जिसके कारण एक ही समय में बहुत सारे सैनिक अपनी जान गवा देते थै। लोगों में अल्फ्रेड नोबेल की इस आविष्कार के बाद काफी गुस्सा था और अपने गुस्से को जाहिर करने के लिए लोगों ने अल्फ्रेड नोबेल को मौत का सौदागर मौत का व्यापारी जैसी संज्ञा देकर पुकारना शुरू कर दिया।
नोबेल प्राइज की स्थापना
शांति के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने अपनी संपत्ति का 94% हिस्सा विश्व के सबसे बड़े पुरस्कार नोबेल प्राइज की स्थापना के लिए दान कर दिया उन्होंने 27 नवंबर 1895 में नोबेल प्राइज की स्थापना की।
नोबेल प्राइज उनकी मृत्यु के 5 साल बाद सन 1901 में देना आरंभ किया गया ।
नोबेल प्राइज उनकी मृत्यु के 5 साल बाद सन 1901 में देना आरंभ किया गया ।
नोबेल प्राइज किन क्षेत्रों में दिया जाता है
नोबेल प्राइज उन लोगों को दिया जाता है जिनके कार्यों से विश्व में बहुत सारे लोगों का भला हुआ हो या कि फिर बहुत सारे लोगों के जीवन में सकारात्मक प्रभाव आया हो यह पुरस्कार फिजिक्स केमिस्ट्री मेडिसन साहित्य व शांति के क्षेत्र मैं कार्य करने वाले लोगों को दिया जाता है। यह पुरस्कार हर साल 10 दिसंबर को दिया जाता है जो कि अल्फ्रेड नोबेल की डेथ एनिवर्सरी है।
मृत्यु
अल्फ्रेड नोबेल की मृत्यु 10 दिसंबर
1896 को इटली में हुई थी।
आज दुनिया उन्हें एक समाज सेवक व विश्व के सबसे बड़े पुरस्कार नोबेल प्राइज की स्थापना करने वाले आविष्कारक के तौर पर हमेशा याद करती हैं।
आज इस ब्लॉग में इतना ही हमें अपना समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद