उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रूस में करीब 97 दिनों तक फंसे रहने के बाद सुरक्षित स्वदेश लौटे पिथौरागढ़ जिले के दो भाइयों से फोन पर बातचीत की और उनका हालचाल जाना। मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता और राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों की बदौलत यह सुखद वापसी संभव हो पाई।
कौन हैं ये दोनों युवक
यह मामला पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र के रांथी गांव के रहने वाले दो भाइयों आनंद सिंह कार्की और भूपेंद्र सिंह कार्की से जुड़ा है। दोनों भाइयों का परिवार वर्तमान में पिथौरागढ़ के चिमस्यानौला इलाके में किराए के मकान में रहता है। कुछ महीने पहले दोनों भाई किसी काम के सिलसिले में रूस गए थे जिसके बाद वे लंबे समय तक वहीं फंसे रह गए।परिवार की चिंता और मदद की गुहार
परिवार का कहना है कि रूस पहुंचने के बाद दोनों भाइयों को स्वतंत्र रूप से आने-जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। परिजनों के अनुसार काम करने से इनकार करने पर उन्हें धमकाया भी जाता था। लंबे समय तक नियमित संपर्क न हो पाने के कारण परिवार की चिंता लगातार बढ़ती गई। शुरुआती दौर में जब दोनों भाई करीब 20 दिनों तक लापता रहे तब परिवार ने मुख्यमंत्री धामी से हस्तक्षेप की गुहार लगाई थी और जरूरत पड़ने पर मामले को भारत सरकार के विदेश मंत्रालय तक ले जाने की बात कही गई थी।सीएम धामी का हस्तक्षेप
परिवार की शिकायत मिलने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संबंधित अधिकारियों को दोनों युवकों की सुरक्षित और शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री कार्यालय के स्तर पर लगातार इस मामले पर नजर रखी गई और जरूरी माध्यमों से संपर्क बनाए रखा गया। इन्हीं प्रयासों का नतीजा रहा कि करीब 97 दिनों के लंबे इंतजार के बाद दोनों भाई अंततः सुरक्षित भारत लौट आए।सीएम पुष्कर सिंह धामी ने फोन पर की बात
दोनों भाइयों की सकुशल वतन वापसी के बाद मुख्यमंत्री धामी ने व्यक्तिगत रूप से फोन पर उनसे बातचीत की। इस दौरान उन्होंने दोनों की कुशलक्षेम जानी और रूस में बिताए गए पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। मुख्यमंत्री का यह फोन कॉल उनके संवेदनशील रवैये को दर्शाता है जिसमें वे राज्य के नागरिकों की सुरक्षा और भलाई को प्राथमिकता देते नजर आएपरिवार ने जताया आभार
लंबे समय बाद अपने दोनों बेटों को सुरक्षित घर लौटा देख परिजनों ने राहत की सांस ली। परिवार ने मुख्यमंत्री धामी के संवेदनशील हस्तक्षेप और त्वरित प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया। यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि संकट के समय राज्य सरकार अपने नागरिकों की मदद के लिए किस तरह सक्रिय भूमिका निभा सकती है।
विदेश में फंसे भारतीय युवाओं का मुद्दा
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से देश के कई राज्यों से युवाओं के एजेंटों के जरिए रूस भेजे जाने और वहां कठिन परिस्थितियों में फंसने की घटनाएं सामने आती रही हैं। कई मामलों में युवाओं को नौकरी के झांसे में विदेश भेजा गया जिसके बाद उन्हें विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। ऐसे में पिथौरागढ़ के इन दोनों भाइयों की सुरक्षित वापसी राज्य सरकार की सक्रियता का एक उदाहरण बनकर सामने आई है, जो इसी तरह की परिस्थितियों में फंसे अन्य परिवारों के लिए भी उम्मीद की किरण है।
