"राहुल गांधी पागल है, हिंदू विरोधी हैं": हिमंता बिस्वा सरमा

25 अगस्त 2026 को दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने एक ओर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा से जुड़े मामले पर अपना रुख स्पष्ट किया तो दूसरी ओर राहुल गांधी को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की।

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Himanta biswa sarma 

हिमंता बिस्वा सरमा ने राहुल गाँधी को बताया पागल

दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए हिमंता बिस्वा सरमा ने काफी तीखी भाषा का इस्तेमाल किया उन्होंने राहुल गांधी को पागल कहा और कहा कि वे बार-बार चुनाव हारते हैं हंगामा खड़ा करते हैं मीडिया में छा जाते हैं और फिर हार के बाद गायब हो जाते हैं। हेमंत बिस्वा सरमा कि राहुल गांधी पर यहां प्रतिक्रिया कांग्रेस नेता पवन खेड़ा से जुड़े मुद्दे पर आई । असम पुलिस और कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के बीच चल रहे विवाद को लेकर जब पत्रकारों ने हिमंता बिस्वा सरमा से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि वे इस मामले पर ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते। उन्होंने कहा कि पवन खेड़ा जहां भी हों, वे खुश रहें। सरमा ने यह भी स्पष्ट किया कि पवन खेड़ा ने गुवाहाटी में जो भी बयान दिए  वे वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग के रूप में असम पुलिस के पास पहले से ही रिकार्ड पर हैं।

कैसे हुआ विवाद शुरू

यह पूरा विवाद पुणे में "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम से जुड़ा है जहां शनिवार 22 अगस्त को राहुल गांधी ने छात्राओं से संवाद करते हुए मनुस्मृति मानसिकता की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि पितृसत्तावादी सोच महिलाओं को उनके पिता, पति और बेटों के अधीन रखती है और इसे तोड़ने की जरूरत है।

सरमा का सोशल मीडिया पर सीधा हमला

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में हिमंता बिस्वा सरमा ने लिखा कि राहुल गांधी महिला अधिकारों के कोई रक्षक नहीं हैं, बल्कि वे केवल हिंदू धर्म को बदनाम करने के लिए महिला सशक्तिकरण के मुद्दे का उपयोग कर रहे हैं। सरमा ने सवाल उठाया कि जब राहुल गांधी मनुस्मृति पर इतने मुखर हैं तो वे शरिया में मौजूद पितृसत्तावादी प्रथाओं पर कभी इसी जोश के साथ क्यों नहीं बोलते? उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने शरिया से जुड़ी किसी भी पितृसत्तावादी और मध्यकालीन प्रथा के खिलाफ कभी उतनी तीखी आवाज नहीं उठाई जितनी वे हिंदू परंपराओं के बारे में उठाते हैं।

मनुस्मृति और शरिया पर तुलनात्मक तर्क

सरमा ने अपने तर्क को और आगे बढ़ाते हुए कहा कि शरिया इस्लामी न्यायशास्त्र की बुनियाद है जबकि मनुस्मृति का हिंदू धर्म में वैसा कोई समकक्ष धार्मिक या कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति सभी हिंदुओं के लिए बाध्यकारी संहिता नहीं है। इसके बावजूद राहुल गांधी बार-बार मनुस्मृति पर हमला करते हैं लेकिन शरिया को लेकर उनकी चुप्पी उनके दोहरे मानदंडों को उजागर करती है।

कर्नाटक कैबिनेट और महिला प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाया सवाल

हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पार्टी के महिला प्रतिनिधित्व के रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद राज्य मंत्रिमंडल में एक भी महिला को जगह नहीं दी गई। उन्होंने शाह बानो मामले में कांग्रेस के रुख और तीन तलाक विरोधी कानून का विरोध करने का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे पार्टी की महिला अधिकारों के प्रति वास्तविक सोच सामने आती है।

निष्कर्ष

हिमंता बिस्वा सरमा की यह तीखी प्रतिक्रिया पुणे के छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी के बयानों की सीधी प्रतिक्रिया है। भारतीय राजनीति में धर्म, महिला अधिकार और समान नागरिक संहिता जैसे संवेदनशील मुद्दों पर मुख्यमंत्री हिमंता विस्वा सरमा ने कांग्रेस को एक बार फिर से घेरा है।

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