राहुल गांधी के मंच पर नेहा सिंह राठौर: "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम में महिलाओं के हक की आवाज़

22 अगस्त 2026 को पुणे में कांग्रेस के युवा जनसंपर्क कार्यक्रम "छात्रों की गूंज" के दौरान एक भावुक और प्रेरणादायक पल देखने को मिला जब प्रसिद्ध भोजपुरी लोकगायिका नेहा सिंह राठौर मंच पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर सीधा संवाद करती नजर आईं।

congress leader rahul gandhi with neha singh rathore at chhatron ki gunj in pune
Rahul gandhi with Neha singh rathore 

क्या है छात्रों की गूंज कार्यक्रम का उद्देश्य

"छात्रों की गूंज" कार्यक्रम खासतौर पर महाराष्ट्र भर की छात्राओं और युवा पेशेवर महिलाओं के लिए एक ऐसा मंच तैयार करने के इरादे से आयोजित किया गया था जहां वे शिक्षा, सुरक्षा, समानता, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार और भविष्य के अवसरों से जुड़े अपने विचार खुलकर रख सकें। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी ने देश की युवा पीढ़ी विशेष रूप से युवतियों की भागीदारी को सार्वजनिक जीवन में और अधिक बढ़ाए जाने की जरूरत पर जोर दिया।

क्या कहा नेहा सिंह राठौर ने कार्यक्रम में

कार्यक्रम के दौरान नेहा सिंह राठौर ने मंच से महिलाओं को मिलने वाले सम्मान और उनकी आवाज़ को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने यह सवाल उठाया कि यदि महिलाएं सत्ता में बैठे लोगों से सवाल ही नहीं पूछ सकतीं तो उन्हें असली सम्मान कैसे मिल पाएगा। भाजपा पर प्रहार करते हुए नेहा ने कहा कि यह सरकार पिछले कई सालों से मेरा विरोध कर रही है लेकिन मैं फिर भी नहीं सुधर रही हूं।

पुणे के इस कार्यक्रम में नेहा सिंह राठौर ने अपना एक विशेष गीत भी प्रस्तुत किया, जो उनकी अपनी मौलिक रचना है। इस गीत की मुख्य पंक्तियां इस प्रकार है 

अरे, तुमसा कोई झूठा और बेईमान नहीं है

किसी एक की बपौती हिंदुस्तान नहीं है

हो, जब हिंदू-मुसलमान खेले खून की होली, 

आबिद हसन बोले जय हिंद की बोली,

अबुल कलाम आजाद की जमीन यहीं है, 

ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान यहीं है, 

अब्दुल हमीद अशफाक उल्ला खान यहीं है।

किसी एक की बपौती हिंदुस्तान नहीं है।

तुमसा कोई झूठा और बेईमान नहीं है। 

किसी एक की बपौती हिंदुस्तान नहीं है

राहुल गांधी की प्रतिक्रिया

नेहा सिंह राठौर के सवाल का जवाब देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वे स्वयं वर्षों से सरकार से सवाल पूछने के कारण आलोचना और विरोध का सामना करते रहे हैं लेकिन इसके बावजूद "मैं भी नहीं सुधर रहा हूं।" उन्होंने आगे कहा कि देश की बेटियां अब डर या दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं और उनकी आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। राहुल गांधी ने इस अवसर पर कहा कि जब लड़कियां बोलेंगी तो पूरा देश उन्हें सुनेगा।

अपने संबोधन में राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि हर महिला को अपने जीवन से जुड़े फैसले खुद लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए बिना किसी अन्य पर निर्भर हुए। उन्होंने देश की बेटियों को राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि उन्हें आगे बढ़ने से रोकने वाली सोच को अब बदलना ही होगा।

सामाजिक टिप्पणी के लिए पहचानी जाती हैं नेहा

नेहा सिंह राठौर मुख्य रूप से भोजपुरी भाषा में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर आधारित अपने गीतों के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने 2019 में भोजपुरी लोकगीत गायन की शुरुआत की थी और उनके गीत "बिहार में का बा?" तथा "यूपी में का बा?" ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। वे भोजपुरी के प्रसिद्ध कवि भिखारी ठाकुर और महेंद्र मिश्र को अपनी प्रेरणा मानती हैं। सामाजिक मुद्दों पर बेबाक टिप्पणी करने की उनकी शैली के चलते वे लगातार चर्चा में रहती हैं।

"छात्रों की गूंज" केवल एक राज्य तक सीमित नहीं

"छात्रों की गूंज" कोई एक-शहर तक सीमित कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह कांग्रेस पार्टी का एक बड़ा राष्ट्रव्यापी जनसंपर्क अभियान है जिसकी शुरुआत राहुल गांधी ने 17 जून 2026 को राजस्थान के कोटा से की थी। कोटा को देशभर से लाखों छात्रों को आकर्षित करने वाले कोचिंग हब के रूप में जाना जाता है इसलिए अभियान की शुरुआत के लिए इसे प्रतीकात्मक रूप से चुना गया। इसके बाद यह अभियान 17 जुलाई 2026 को उत्तराखंड के देहरादून और 8 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भी आयोजित किया गया। पुणे में हुआ कार्यक्रम इस श्रृंखला का चौथा चरण था जिसमें विशेष रूप से महिला-केंद्रित मुद्दों पर चर्चा की गई।

क्या है कार्यक्रम का व्यापक संदेश

"छात्रों की गूंज" जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से कांग्रेस पार्टी युवाओं विशेषकर युवतियों को सीधे नेतृत्व से जुड़ने और अपनी बात रखने का अवसर देने का प्रयास कर रही है। पुणे के इस कार्यक्रम में हुआ यह संवाद इस बात का उदाहरण बना कि किस तरह कला और राजनीति एक मंच पर आकर सामाजिक मुद्दों को व्यापक जनसमूह तक पहुंचा सकते हैं। 

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