क्या है पूरा मामला
गडकरी की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल मुकदमे के अनुसार, सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री प्रसारित हो रही है जिसमें डीपफेक तस्वीरों और वीडियो के जरिए झूठे तरीके से यह दिखाया गया कि उन्हें और उनके परिवार को E20 योजना से सीधा आर्थिक फायदा हुआ है। याचिका में स्पष्ट किया गया है कि इथेनॉल-मिश्रण नीति का प्रशासन पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा किया जाता है, न कि सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा।
न्यायमूर्ति अभय आहूजा ने गडकरी के वकील संदीप एस. लड्डा की दलीलें सुनने के बाद उन्हें मेटा, गूगल तथा अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ-साथ अज्ञात व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ दीवानी मानहानि का मुकदमा दायर करने की अनुमति दी है। याचिका लेटर्स पैटेंट के क्लॉज़ XII के तहत दाखिल की गई थी। बताया जा रहा है कि यह सिविल कार्रवाई नागपुर में लगभग दो सप्ताह पहले दर्ज कराई गई एक आपराधिक प्राथमिकी (FIR) के बाद उठाया गया अगला कदम है। उस FIR में यूट्यूबर-राजनेता मनीष कश्यप, इंस्टाग्राम हैंडल "देसी बॉयज़" तथा प्रभावशाली व्यक्तियों हर्षित राठी और अंकलेश इनवाती को नामजद किया गया था, जिन पर मंत्री और E20 रोलआउट को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप है।
विवाद की जड़ में क्या है
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए दावा किया कि गडकरी के पुत्रों से जुड़ी कंपनियां—निखिल गडकरी की सायन एग्रो इंडस्ट्रीज़ इन्फ्रास्ट्रक्चर और सारंग गडकरी जिस मानस एग्रो इंडस्ट्रीज़ में निदेशक हैं—इथेनॉल आपूर्ति के कारोबार में सक्रिय हैं। खेड़ा के अनुसार सायन एग्रो का राजस्व जून 2024 से जून 2025 के बीच काफी तेजी से बढ़ा, और इसी अवधि में कंपनी के शेयर मूल्य में भी भारी उछाल दर्ज हुआ। इसी आधार पर कांग्रेस ने लोकपाल से जांच की मांग उठाई और सवाल किया कि क्या E20 नीति एक जनहितकारी कदम है या गडकरी परिवार से जुड़ी कंपनियों के लिए एक अप्रत्याशित लाभ का जरिया।
गडकरी और उनकी टीम का पक्ष यह है कि इथेनॉल-मिश्रण नीति से जुड़ा हर निर्णय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि उनके मंत्रालय के अधीन। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही सामग्री तथ्यों से परे है और जानबूझकर उन्हें तथा उनके परिवार को बदनाम करने के इरादे से बनाई गई है।
E20 को लेकर पहले से जारी बहस
E20 पेट्रोल—जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है—को लेकर आम उपभोक्ताओं और वाहन मालिकों के बीच लंबे समय से चिंता जताई जा रही है। कई लोगों का आरोप है कि उच्च इथेनॉल मिश्रण से माइलेज घटता है और इंजन को नुकसान पहुंच सकता है, जबकि सरकार और अधिकांश वाहन निर्माता कंपनियां इसे संगत वाहनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित बताती हैं। दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने भी E20 नीति के विरोध में 4 अगस्त को संसद तक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है, जिसमें बढ़ती परिचालन लागत को मुख्य मुद्दा बताया गया है।
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रीमियम ग्रेड पेट्रोल—जैसे इंडियन ऑयल का XP100, हिंदुस्तान पेट्रोलियम का पॉवर100 और भारत पेट्रोलियम का स्पीड100—में इथेनॉल मिश्रण नहीं किया जाता, क्योंकि ये विशेष प्रदर्शन-वर्धक योजकों वाले सीमित बिक्री वाले उत्पाद हैं।
