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shri ram stuti meaning in hindi | श्री राम स्तुति का हिंदी अर्थ

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    नमस्कार दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री राम स्तुति का हिंदी अर्थ (shri ram stuti meaning in hindi ) जानगें। 

    यूं तो राम स्तुति को भजना  ही आनंदकारी है पर यदि इसका अर्थ पता हो तो इसे भजने में और भी अधिक आनंद आता है। तुलसीदास जी द्वारा श्री हनुमान चालीसा बजरंग बाण श्री हनुमान अष्टक जैसे अन्य पाठो की भी रचना की गई है। यह तुलसीदास जी द्वारा रचित विनय पत्रिका की 45 वीं रचना है तथा यह हरिगीतिका छंद के रूप में लिखी गई है यह राग गौरी पर आधारित है। आइए सबसे पहले राम स्तुति पढ़ते हैं फिर जानते हैं इसका हिंदी अनुवाद



     || सियावर रामचंद्र की जय ||

    ।।श्री राम स्तुति ।।


    श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन ,हरण भव भय दारुणं ।
    नव कंज लोचन, कंज मुख, कर कंज पद, कंजारुणं ।।

    कंदर्प अगणित अमित छबि नवनील- नीरद सुन्दरं ।

    पट पीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं।।

    भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्यवंश-निकंदनंं।
    रघुनंद आनंदकंद कोशलचंद्र दशरथ-नंदनं।।

    सिर मुकुट कुंडल तिलक चारू उदारू अंग विभूषणं।
    आजानुभुज शर -चाप धर ,संग्राम जित खरदूषणं।।

    इति वदति तुलसीदास शंकर- शेष- मुनि मान-रंजनं ।
    मम ह्रदय कंज निवास कुरु, कामादि खल-दल- गजंनं ।।

    एहि भांति गौरि असीस सुनि सिय सहित हिय हर्षी अली।
    तुलसी भवानिहि पूजी पुनि- पुनि मुदित मन मंदिर चली।।


    ।। दोहा ।।

    जानि गौरि अनुकूल सिय ही हरषु न जाए कहि।
    मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे ।।


    ||श्री राम स्तुति का हिंदी अर्थ||



    श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन ,हरण भव भय दारुणं ।
    नव कंज लोचन, कंज मुख, कर कंज पद, कंजारुणं ।।


    अर्थ - तुलसीदास जी आम जनमानस को संदेश देते हुए अपने मन से कह रहे हैं की है मेरे मन तू सब पर कृपा करने वाले उन भगवान श्री राम जी का जाप कर तथा उनका नाम इस संसार के कपकपा देने वाले भयों तथा दुखों को दूर करने वाला है। अब वे राम जी के सौंदर्य का वर्णन करते हुए बताते हैं कि उनकी आंखें, मुख हाथ तथा पाव नये खिले हुए लाल कमल के समान है।




    कंदर्प अगणित अमित छबि नवनील- नीरद सुन्दरं ।

    पट पीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं।।


    अर्थ - अब तुलसीदास जी श्री राम जी के सौंदर्य का आगे वर्णन करते हुए कहते हैं कि अनगिनत कामदेव का सौंदर्य भी उनके सामने फीका नजर आता है  उनके शरीर का रंग नीले पानी से भरे हुए बादल के समान सुंदर है तथा उनके शरीर पर पीले वस्त्र मानो ऐसे लग रहे हो जैसे उन नीले बादलों में पवित्र बिजली कड़कती है। वे भगवान श्री राम जनक पुत्री मां सीता के पति हैं ।


    भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्यवंश-निकंदनंं।
    रघुनंद आनंदकंद कोशलचंद्र दशरथ-नंदनं।।


    अर्थ -तुलसीदास जी अपने मन को बार-बार समझाते हुए कह रहे हैं कि हे मन तू उन भगवान श्री राम जी का भजन कर जो सूर्य के समान तेजस्वी है जो राक्षसों के वंश का नाश करने वाले हैं  जो रघुकुल की संतान हैं सबको आनंद देने वाले हैं, कौशल है व राजा दशरथ के पुत्र हैं।


    सिर मुकुट कुंडल तिलक चारू उदारू अंग विभूषणं।
    आजानुभुज शर -चाप धर ,संग्राम जित खरदूषणं।।


    अर्थ - तुलसीदास जी राम जी के बारे में बताते हैं कि वे सिर पर मुकुट ,कानों में कुंडल, माथे पर तिलक तथा शरीर पर आभूषण यह चारों चीजें धारण करते हैं तथा उनके हाथ घुटनों तक पहुंचते है वे धनुष बाण को धारण करते हैं तथा उन्होंने युद्ध में खर दूषण जैसे दैत्य को अकेले ही  पराजित किया ।



    इति वदति तुलसीदास शंकर- शेष- मुनि मान-रंजनं ।
    मम ह्रदय कंज निवास कुरु, कामादि खल-दल- गजंनं ।।


    अर्थ -तुलसीदास जी कहते हैं कि मैं यह बताता हूं भगवान श्री राम जी का नाम जो भगवान शंकर तथा अन्य ऋषि-मुनियों को आनंदित करने वाला है वे मेरे हृदय कमल में सदैव निवास करें तथा मेरे हृदय से काम क्रोध लोभ आदि चीजों को नष्ट कर दे। 



    मनु जाहि राचेहु मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सांवरो ।
    करुणानिधान सुजान सीलु स्नेहु जानत रावरौ ।।


    अर्थ -तुलसीदास जी मां सीता के लिए कहते हैं कि जिसमें आपका मन अनुरक्त हो गया है जो सहज है ,सुंदर है सांवले रंग के हैं वे आपको पति के रूप में प्राप्त होंगे यह आशीर्वाद मां भवानी द्वारा मां सीता को दिया जाता है। वे भगवान श्री राम जो करूना की खान है सुजान है ,सील हैं। वे उनके प्रति आपके स्नेह को जानते हैं।



    एहि भांति गौरि असीस सुनि सिय सहित हिय हर्षी अली।
    तुलसी भवानिहि पूजी पुनि- पुनि मुदित मन मंदिर चली।।


    अर्थ -इस प्रकार मां भवानी का आशीर्वाद सुनकर मां सीता और उनकी सखियों के हृदय में अपार खुशी हुई। तथा मां सीता और उनकी सखियां मां भवानी को बार-बार पूज कर वापस राजमहल को लौट चली।


    ।। दोहा ।।

    जानि गौरि अनुकूल सिय ही हरषु न जाए कहि।
    मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे ।।


    अर्थ - मां भवानी को अपने अनुकूल पाकर मां सीता के हृदय की खुशी को कहा नहीं जा सकता है तथा मंगल कार्यों का संकेत देने वाले उनके बाएं अंग फड़कने लगे।


        || सियावर रामचंद्र की जय ||
        || पवनसुत हनुमान की जय ||


    Ram stuti,ram ji
    Shri Ram stuti meaning in hindi 


    हमने क्या सीखा


    तो दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम नहीं श्री राम स्तुति का हिंदी अर्थ (shri ram stuti meaning in hindi)जाना 


    दोस्तों मेरा यह आर्टिकल shri ram stuti meaning in hindi आपको पसंद आया हो तो इसे अन्य लोगों के साथ भी जरूर शेयर कीजिए धन्यवाद
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