नमस्कार दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है इसके बारे में जानेंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति को P.O.T.U.S कहा जाता है। इसका मतलब है प्रेसिडेंट ऑफ यूनाइटेड स्टेट ।अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव भी अप्रत्यक्ष विधि से होता है अर्थात वहां की जनता वहां के राष्ट्रपति को सीधे नहीं चुनती है बल्कि जनता के द्वारा चुने गए प्रतिनिधि वहां के राष्ट्रपति को चुनते हैं और यही अप्रत्यक्ष विधि भारत में भी अपनाई जाती है। पर अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव कई मायनों में भारत से भिन्न है आइए इसे समझते हैं-
अमेरिकी राष्ट्रपति को P.O.T.U.S कहा जाता है। इसका मतलब है प्रेसिडेंट ऑफ यूनाइटेड स्टेट ।अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव भी अप्रत्यक्ष विधि से होता है अर्थात वहां की जनता वहां के राष्ट्रपति को सीधे नहीं चुनती है बल्कि जनता के द्वारा चुने गए प्रतिनिधि वहां के राष्ट्रपति को चुनते हैं और यही अप्रत्यक्ष विधि भारत में भी अपनाई जाती है। पर अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव कई मायनों में भारत से भिन्न है आइए इसे समझते हैं-
अमेरिकी का राष्ट्रपति चुनाव
अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया में बहुत सारे चरण शामिल है।आइए सबसे पहले समझते हैं कि राष्ट्रपति उम्मीदवार की योग्यता क्या होनी चाहिए-
राष्ट्रपति उम्मीदवार की योग्यता
1. वह अमेरिका का नागरिक होना चाहिए।
2. उसकी आयु 35 वर्ष पूरी होनी चाहिए।
3. वह पिछले 14 सालों से अमेरिका में ही रह रहा हो।
2. उसकी आयु 35 वर्ष पूरी होनी चाहिए।
3. वह पिछले 14 सालों से अमेरिका में ही रह रहा हो।
चुनाव की शुरुआत
वहां के वर्तमान राष्ट्रपति के तीन साल के कार्यकाल पूरे होने के बाद ही वहां के अगले राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाती है विभिन्न राजनीतिक पार्टियों से जो भी राष्ट्रपति बनना चाहते हैं। उन्हें पहले ही बताना होता है।कई पार्टियों से राष्ट्रपति के लिए एक से ज्यादा व्यक्ति इच्छुक हो सकते हैं। उस स्थिति में पार्टियां यह तय करती है कि उनका फाइनल राष्ट्रपति उम्मीदवार कौन होगा।
राष्ट्रपति उम्मीदवार का चयन
राष्ट्रपति उम्मीदवार का चयन विभिन्न पार्टियों के प्रतिनिधियों(delicates) द्वारा किया जाता है और इन प्रतिनिधियों का चयन उस पार्टी द्वारा दो आधार पर किया जाता है-
Primeries प्राइमरीज
caucuses कॉकसेस
Primeries प्राइमरीज
caucuses कॉकसेस
अमेरिका में वर्तमान में 50 राज्य हैं और उन 50 राज्यों में कोई राज्य प्राइमरीस तो कोई राज्य कॉकसेस का इस्तेमाल करके अपने प्रतिनिधियों को चुनता है
प्राइमरीस(Primeries)-इस प्रक्रिया में प्रत्येक राज्य के वोटर किसी राजनीतिक पार्टी की प्रतिनिधियों को चुनते हैं व चुनाव बैलेट पेपर से होता है।
(caucuses)कॉकसेस-इस प्रक्रिया में किसी पार्टी के कुछ सदस्य हाथ खड़ा करके उस पार्टी के प्रतिनिधियों को चुनते हैं।इसके बाद वहां पर राष्ट्रपति मनोनयन सम्मेलन( President nomination convention)आयोजित किया जाता है। 50 राज्यों से चुने गए प्रतिनिधि आखिरकार राष्ट्रपति मनोनयन सम्मेलन में जाकर अपनी पार्टी के राष्ट्रपति उम्मीदवार का फाइनल चयन करते हैं।
इस प्रकार वहां राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार की चयन प्रक्रिया समाप्त होती है।
चुनाव प्रक्रिया
पार्टियों के उम्मीदवारों के चयन के बाद वहां पर एक निर्वाचन समिति(electoral college) का गठन किया जाता है यह निर्वाचन समिति राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति को चुनती है तथा इस निर्वाचन समिति को आम नागरिकों द्वारा चुना जाता है। और इसमें वहां की संसद के बराबर ही सदस्य होते हैं इस समिति का गठन केवल राष्ट्रपति व को चुनने के लिए ही किया जाता है और राष्ट्रपति चुनाव के बाद यह समिति अस्तित्व में नहीं रहती है। अर्थात अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में वहां की संसद के सदस्यों की भागीदारी नहीं होती
यह निर्वाचन समिति दो सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स(भारत में लोकसभा के समान ही) और सीनेट (भारत में राज्यसभा के सामान ही) से मिलकर बनी हुई होती है।
विभिन्न राजनीतिक पार्टियां हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (House of representatives) व सीनेट (senate)के लिए अपने उम्मीदवार उतारती है।
प्रत्येक राज्य से सीनेट की 2 सीटें व हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव की उस राज्य की जनसंख्या के हिसाब से सीटें तय की जाती है।
इस प्रकार अमेरिका में 435 सिटेंं हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव की तथा 100 सीटें सीनेट की व तीन सीटें वहां की राजधानी वॉशिंगटन डीसी जिसमें 2 सीटें सीनेट की व एक सीट हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव की शामिल होती है, को मिलाकर 538 सीटें होती हैं।
आम चुनाव के दिन वहां की जनता बैलट पेपर द्वारा इन इलेक्ट्रोल कॉलेज के सदस्यों को चुनती है।
यह निर्वाचन समिति दो सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स(भारत में लोकसभा के समान ही) और सीनेट (भारत में राज्यसभा के सामान ही) से मिलकर बनी हुई होती है।
विभिन्न राजनीतिक पार्टियां हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (House of representatives) व सीनेट (senate)के लिए अपने उम्मीदवार उतारती है।
प्रत्येक राज्य से सीनेट की 2 सीटें व हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव की उस राज्य की जनसंख्या के हिसाब से सीटें तय की जाती है।
इस प्रकार अमेरिका में 435 सिटेंं हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव की तथा 100 सीटें सीनेट की व तीन सीटें वहां की राजधानी वॉशिंगटन डीसी जिसमें 2 सीटें सीनेट की व एक सीट हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव की शामिल होती है, को मिलाकर 538 सीटें होती हैं।
आम चुनाव के दिन वहां की जनता बैलट पेपर द्वारा इन इलेक्ट्रोल कॉलेज के सदस्यों को चुनती है।
Winner Takes all
यह इस चुनाव का बेहद महत्वपूर्ण व अवैज्ञानिक चरण है।इस नियम की मुताबिक यदि किसी राज्य में सीनेट व हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की कुल 60 सीटें हैं व कोई पार्टी इन 60सीटों में से आधी सीटों से ज्यादा जीत जाती है तब उस राज्य की सभी 60 सीटें उस पार्टी की ही हो जाएंगी।
वहां राष्ट्रपति चुनाव हर 4 साल बाद नवंबर के पहले सोमवार के बाद आने वाले मंगलवार को होता है। इलेक्ट्रोल कॉलेज के सदस्यों का चुनाव हो जाने के बाद लगभग होता है हो जाता है कि वहां का अगला राष्ट्रपति कौन होगा। इलेक्ट्रोल कॉलेज के सदस्य अगले महीने राष्ट्रपति को चुनने के लिए अपनी वोटिंग करते हैं यदि कोई पार्टी 270 या उससे अधिक इलेक्ट्रॉन कॉलेज के सदस्यों का समर्थन प्राप्त करती है तो उस पार्टी का राष्ट्रपति उम्मीदवार वहां का राष्ट्रपति बन जाता है। और 20 जनवरी को इनॉग्रेशन डे के दिन नए राष्ट्रपति का कार्यकाल शुरू हो जाता है।
राष्ट्रपति का कैबिनेट व कार्यकाल
अमेरिकी राष्ट्रपति अपने कैबिनेट में किसी भी व्यक्ति को शामिल कर सकता है वह व्यक्ति वहां की संसद का सदस्य नहीं होता है।अमेरिका के राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 साल का होता है वह कोई भी व्यक्ति 2 से अधिक बार राष्ट्रपति पद पर नहीं रह सकता।
तो यह थी अमेरिका के राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया।
तो यह थी अमेरिका के राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया।
आज के इस आर्टिकल में हमने जाना कि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव कैसे होता है अपना समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद
इस आर्टिकल को अन्य लोगों के साथ भी शेयर कीजिए।
इस आर्टिकल को अन्य लोगों के साथ भी शेयर कीजिए।
