नमस्कार दोस्तों आज हम रसायन विज्ञान की एक महत्वपूर्ण घटना जिसे परासरण कहते हैं के बारे में जानेंगे सबसे पहले हम परासरण को समझते हैं और उसके बाद परासरण दाब और इसे ज्ञात करने की विधियों के बारे में जानेंगे।
परासरण(Osmosis)
जब किसी शुद्ध विलायक व विलयन के मध्य एक अर्ध पारगम्य झिल्ली रखी जाती है या के फिर एक तनु विलयन या सांद्र विलयन के मध्य अर्ध पारगम्य झिल्ली को रखा जाता है तब विलायक कणों का शुद्ध विलायक से होकर विलियन में या तनु विलयन से सांद्र विलियन में स्वत स्फूर्त प्रवाह ही परासरण कहलाता है ।
क्या कारण है कि जब छिले हुए अंडे को पानी में रखा जाता है तो यह फूल जाता है और जब इसे नमक के विलयन में रखा जाता है तो यह सिकुड़ जाता है?
यह घटना परासरण का एक विशिष्ट उदाहरण है इस प्रक्रिया को हम परासरण के आधार पर समझाएंगे देखिए जब छिले हुए अंडे को पानी में रखा जाता है तब छिले हुए अंडे के भीतर का विलयन सांद्र होता है जबकि जल एक शुद्ध विलायक की भांति कार्य करता है और शुद्ध विलायक अंडे के अंदर प्रवेश कर जाता है इस कारण अंडा फूल जाता है।
जबकि दूसरी ओर जब अंडे को नमक के विलयन में रखा जाता है तब अंडे के भीतर का विलयन नमक के विलयन की तुलना में कम सांद्र होता है इस कारण विलायक कोणों का तनु विलियन से सांद्र विलियन में प्रवाह शुरू हो जाता है और अंडा सिकुड़ने लगता है।
परासरण दाब क्या है
जब शुद्ध विलायक वह विलयन के मध्य एक अर्ध पारगम्य झिल्ली रखी जाती है तब विलायक कणों का अर्ध पारगम्य झिल्ली से होकर विलियन में प्रवाह परासरण कहलाता है इस प्रक्रिया में हम विलियन पर एक दाब मापी लगा देते हैं ताकि हम परासरण की प्रक्रिया को रोक सके अतः दाब मापी द्वारा वह दाब नाप लिया जाता है जो की परासरण प्रक्रिया को रोकने के लिए उपयुक्त होता है।
परासरण दाब वह प्रक्रिया है जिसमें परासरण की क्रिया रुक जाती है परासरण दाब को इस प्रकार परिभाषित किया जाता है" विलयन पर लगाया गया वह दाब जिससे परासरण की क्रिया रुक जाती है परासरण दाब कहलाता है अर्थात विलायक कणों का अर्ध पारगम्य झिल्ली से होकर विलयन में जाना रुक जाता है। परासरण दाब को π से निरूपित किया जाता है और परासरण दाब के आधार पर ही विलयनो को पुनः तीन भागों में बांटा जाता है।
परासरण दाब वह प्रक्रिया है जिसमें परासरण की क्रिया रुक जाती है परासरण दाब को इस प्रकार परिभाषित किया जाता है" विलयन पर लगाया गया वह दाब जिससे परासरण की क्रिया रुक जाती है परासरण दाब कहलाता है अर्थात विलायक कणों का अर्ध पारगम्य झिल्ली से होकर विलयन में जाना रुक जाता है। परासरण दाब को π से निरूपित किया जाता है और परासरण दाब के आधार पर ही विलयनो को पुनः तीन भागों में बांटा जाता है।
समपरासरी विलयन
समपरासरी विलयन ऐसे विलयन होते हैं जिनका परासरण दाब के समान होता हैं। अर्थात् पहले विलयन का परासरण दाब दूसरे विलयन के परासरण दाब के बराबर होता है।
अतिपरासरी विलयन
जब दो विलयनो के परासरण दाब की तुलना की जाती है। यदि एक विलयन का परासरण दाब दूसरे विलयन के परासरण दाब से अधिक है तो अधिक परासरण दाब वाले विलयन को अतिपरासरी विलयन कहा जाता है।
न्यूनपरासरी विलयन
तथा तुलना के बाद जिस विलयन का परासरण दाब कम होता है उसे न्यूनपरासरी विलयन
कहा जाता है।
प्रतिलोम परासरण क्या है
यह प्रक्रिया पूर्णता परासरण दाब पर आधारित है और यह परासरण दाब की एकदम विपरीत प्रक्रिया है।
इस प्रक्रिया में शुद्ध विलायक व विलयन के मध्य एक अर्ध पारगम्य झिल्ली रखी जाती है साधारणतः यह होना चाहिए था कि विलायक के कण अर्ध पारगम्य झिल्ली से पार होकर विलयन में प्रवेश कर जाए लेकिन जैसे यह प्रक्रिया शुरू होती है तब विलयन में परासरण दाब से अधिक दाब लगाया जाता है और इसी दाब के कारण परासरण की प्रक्रिया रुक जाती है और परासरण दाब से अधिक होने के कारण प्रतिलोम परासरण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है जिसमें विलायक के कण विलियन से शुद्ध विलायक में चले जाते हैं ।
इस प्रक्रिया का प्रयोग समुंद्री जल को शुद्ध करने में किया जाता है।
परासरण दाब को ज्ञात करने की सबसे उपयुक्त विधि बर्कले हार्टले मेथड है ।
इस विधि में हम परासरण की प्रक्रिया का उपयोग कर परासरण दाब को मापते हैं। इस विधि की चर्चा अगले आर्टिकल में करेंगे यदि आप लोग कमेंट करें तो।
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