ग्लोबल वॉर्मिंग
ग्लोबल वॉर्मिंग दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है ग्लोब- पृथ्वी तथा वॉर्मिंग - गर्म होना इस प्रकार ग्लोबल वार्मिंग का अर्थ निकलता है कि पृथ्वी का गर्म होना यानी कि पृथ्वी के तापमान में वृद्धि होना ।
ग्लोबल वार्मिंग का कारण
देखिए आप समझ गए होंगे कि ग्लोबल वार्मिंग पृथ्वी के तापमान में वृद्धि होना है अब यह समझते हैं कि आखिर पृथ्वी के तापमान में वृद्धि क्यों हो रही है और यह हमारे के लिए खतरे का संकेत क्यों है? देखिए पृथ्वी के तापमान में वृद्धि होने का सबसे बड़ा कारण ग्रीन हाउस प्रभाव की अधिकता है तो आइए ग्रीन हाउस प्रभाव को समझ लेते हैं इस प्रभाव को हरित ग्रह प्रभाव भी कहा जाता है।
ग्रीन हाउस प्रभाव
पृथ्वी पर सूर्य से ऊर्जा विकिरण के रूप में आती है आदर्श रूप से तो यह होना चाहिए था कि सूर्य की किरणें पृथ्वी की सतह से टकराकर अर्थात परावर्तित होकर पुनः वापस लौट जानी चाहिए थी पर ऐसा होता नहीं है पृथ्वी के वायुमंडल में कुछ कैसे ऐसी होती हैं जो सूर्य से आने वाले विकिरण को अवशोषित करती हैं और हमारे वायुमंडल को ऊष्मा प्रदान करके इसे गर्म बनाए रखते हैं तू इस प्रकार की गैसों को ग्रीनहउस गैसेस कहा जाता है इस प्रभाव को ही ग्रीन हाउस प्रभाव कहा जाता है।
यदि पृथ्वी पर ग्रीनहाउस कैसे नहीं होती तब सूर्य से आने वाला संपूर्ण विकिरण पृथ्वी से टकरा कर वापस लौट जाता और हमारी पृथ्वी का तापमान इतना कम होता कि यहां रहना किसी भी जीव के लिए संभव नहीं था उदाहरण के तौर पर कार्बन डाइऑक्साइड एक मुख्य ग्रीन हाउस गैस है इस गैस का उपयोग पेड़ पौधे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा अपना भोजन तैयार करने के लिए करते हैं साथ ही हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं अतः पेड़ पौधों के लिए CO2 आवश्यक तो है ही हमारे लिए भी आवश्यक है। इस प्रकार ग्रीन हाउस गैसें पृथ्वी के लिए आवश्यक है पर इनकी अधिकता हमारे वायुमंडल के लिए दिन प्रतिदिन घातक सिद्ध हो रही है ऐसा इसलिए क्योंकि ग्रीन हाउस गैसों की अधिकता का मतलब है की इनके द्वारा सूर्य से आने वाले विकिरण का अधिकतम अवशोषण होगा और यह हमारे पृथ्वी के तापमान में साल दर साल वृद्धि करेंगी। यदि हम हमारी पृथ्वी की बात करें तो इसका तीन चौथाई हिस्सा पानी है वह इकाई हिस्सा रहने योग्य। इस इकाई हिस्से में पहाड़ वह ग्लेशियर भी शामिल है यदि पृथ्वी का तापमान यूं ही बढ़ता रहा तब यह ग्लेशियर पिघल कर पृथ्वी पर जल प्रलय का कारण बन सकती हैं यही कारण है कि ग्लोबल वार्मिंग का खतरा समूचे विश्व पर मंडरा रहा है अब तो आप समझ ही गए होंगे कि ग्लोबल वार्मिंग क्या है।
आइए अब यह समझते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के उपाय क्या है
यदि हम चाहते हैं कि पृथ्वी पर हमारा वन्य जीव जतुओं का अस्तित्व बना रहे तब हमें ग्लोबल वॉर्मिंग के कारणों को समझ कर इसे कम करने की दिशा में अपने कदम बढ़ाने होंगे आइए जानते हैं कि ग्लोबल वॉर्मिंग को कम कैसे किया जाए-
ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के उपाय
ग्रीन हाउस गैसों को बढ़ने से रोकना
जैसा हम जान चुके हैं कि ग्रीन हाउस गैसों की अधिकता ही ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार है अतः वायुमंडल को प्रदूषित होने से बचाना होगा क्योंकि हम वायुमंडल को प्रदूषित कर अपनी पृथ्वी से खिलवाड़ कर रहे हैं।
पेड़ लगाना
यदि हम पेड़ लगाते हैं तब पेड़ हमारे वायुमंडल की दूषित वायु को अवशोषित कर लेते हैं वह हमें शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान करते हैं आज तो ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए वायुमंडल पर पेड़ों की अधिकता आवश्यक है।
जनसंख्या पर नियंत्रण करना
जनसंख्या वृद्धि भी ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए जिम्मेदार है क्योंकि पृथ्वी पर संसाधन सीमित हैं जबकि इसके उपयोग करने वालों की संख्या सीमित होती जा रही है और संसाधनों के अभाव में लोक जाने अनजाने में पृथ्वी को दूषित करने की ओर अपनी भागीदारी दे रहे हैं।
उद्योग धंधे व कारखानों की संख्या को सीमित करना
उद्योग धंधों से निकलने वाला जहरीला धुआं व अजैविक कूड़ा आम जनमानस को नुकसान तो पहुंचा ही रहा है साथ ही पृथ्वी पर ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा में भी व्यक्ति कर रहा है अथवा प्रत्येक राष्ट्र की सरकार को चाहिए कि वे अपने देश में उद्योग धंधे व कारखानों के लिए सख्त से सख्त कानून बनाएं ताकि वह हमारे वायुमंडल को कम से कम दूषित करें।
तो यह कुछ उपाय थे जिनको करके हम ग्लोबल वॉर्मिंग को कम करने में अपना योगदान दे सकते हैं और अपनी पृथ्वी को स्वच्छ बनाए रख सकते हैं।
ग्रीन हाउस/पोली हाउस व ग्रीनहाउस फार्मिंग
देखिए ग्रीन हाउस का उपयोग सामान्य तौर पर उन सब्जियों को उगाने के लिए किया जाता है जो कि कम तापमान पर नहीं उग सकती इसलिए एक पॉलिथीन का घर बनाया जाता है जोकि कार्बन डाइऑक्साइड की तरह व्यवहार करता है कहने का मतलब यह है कि यह सूर्य की ऊष्मा को तो अंदर आने देता है पर उस ऊष्मा को बाहर नहीं जाने देता है इस प्रकार पॉलीथिन के इस घर में फसलों के लिए ,सब्जियों के लिए उपयुक्त तापमान बना रहता है और किसानों के लिए खेती करना आसान हो जाता है इस प्रकार की खेती को ग्रीनहाउस फार्मिंग कहा जाता है।
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