Web 3.0
नमस्कार दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम वेब 3.0 क्या है वह इससे जुड़े आपके सभी प्रश्नों का उत्तर देंगे तो आर्टिकल को अंत तक पढ़ते रहिएगा ।
वेब 3.0 की अवधारणा बहुत लंबे समय से चल रही है पर यह अभी तक पूर्ण रुप से लागू नहीं हुआ है।
वेब 3.0 को इंटरनेट जगत में एक क्रांति के तौर पर देखा जा रहा है तो उसे समझने से पहले आइए समझते हैं की वेब 1.0 और वेब 2.0 क्या है?
वेब 3.0 की अवधारणा बहुत लंबे समय से चल रही है पर यह अभी तक पूर्ण रुप से लागू नहीं हुआ है।
वेब 3.0 को इंटरनेट जगत में एक क्रांति के तौर पर देखा जा रहा है तो उसे समझने से पहले आइए समझते हैं की वेब 1.0 और वेब 2.0 क्या है?
Web 1.0
वेब 1.0 की शुरुआत साल 1989 में हुई थी उस समय इंटरनेट के इस्तेमाल का तरीका बहुत अलग था । लोग उस समय इंटरनेट पर किसी भी वेबसाइट पर जाकर केवल आर्टिकल पढ़ सकते थे। लोग उस आर्टिकल पर अपने सुझाव या कि फिर उस आर्टिकल से जुड़े वीडियोस नहीं देख सकते थे। इसी को वेब 1.0 कहा जाता है।
Web 2.0
इसी के 10 साल बाद साल 1999 में वेब 2.0 की शुरुआत हुई और अभी तक वेब 2.0 ही चल रहा है ।लेकिन अब इंटरनेट के इस्तेमाल का तरीका पहले से काफी एडवांस हो चुका है। इस समय लोग किसी भी वेबसाइट पर जाकर अपने बारे में कुछ निजी जानकारी देकर जैसे कि ईमेल आईडी ,मोबाइल नंबर या अपना पता देकर उस वेबसाइट के एक सदस्य बन जाते हैं साथ ही उनकी कुछ नियमों व शर्तों को भी हमें मानना होता है और उस वेबसाइट पर उपस्थित आर्टिकल, फोटो, या वीडियो पर अपने सुझाव दे सकते हैं या अपने खुद के आर्टिकल, फोटो या वीडियो वहां पर अपलोड कर सकते हैं। और उन्हें अन्य लोगों के साथ शेयर भी कर सकते हैं।
Web2.0 की कमियाॅ
वेब 2.0 की सबसे बड़ी कमी है कि इसमें हमारे द्वारा किसी वेबसाइट को दी गई जानकारी पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता वह उस वेबसाइट पर निर्भर करता है कि वह हमारी जानकारी को अपनी वेबसाइट पर रखता है या उसे किसी अन्य के साथ शेयर करता है।
उदाहरण के तौर पर हम फेसबुक ,इंस्टाग्राम व्हाट्सएप यूज करते हैं और हमारी सारी निजी जानकारियां इनके पास होती हैं (जैसे हमारी पोस्ट, हमारे फोटोस हमारे वीडियोस, इत्यादि)यदि इन कंपनियों के मालिक चाहे तो तो हमारी जानकारी को किसी भी अन्य कंपनी के साथ शेयर कर सकते हैं और हम कुछ नहीं कर पाएंगे।
और अपनी खबरों में सुना ही होगा कि फेसबुक व्हाट्सएप या किसी अन्य वेबसाइट पर निजी जानकारी को शेयर करने से संबंधित शिकायतें आती रहती हैं।
पर वेब 3.0 की अवधारणा बिल्कुल अलग है-
उदाहरण के तौर पर हम फेसबुक ,इंस्टाग्राम व्हाट्सएप यूज करते हैं और हमारी सारी निजी जानकारियां इनके पास होती हैं (जैसे हमारी पोस्ट, हमारे फोटोस हमारे वीडियोस, इत्यादि)यदि इन कंपनियों के मालिक चाहे तो तो हमारी जानकारी को किसी भी अन्य कंपनी के साथ शेयर कर सकते हैं और हम कुछ नहीं कर पाएंगे।
और अपनी खबरों में सुना ही होगा कि फेसबुक व्हाट्सएप या किसी अन्य वेबसाइट पर निजी जानकारी को शेयर करने से संबंधित शिकायतें आती रहती हैं।
पर वेब 3.0 की अवधारणा बिल्कुल अलग है-
Web 3.0 क्या है
यह वेब 2.0 का नया रूप है। वेब 3.0 का मुख्य उद्देश्य इंटरनेट को डिसेंट्रलाइज करना है।
डिसेंट्रलाइज
मान लीजिए कि भारत में फेसबुक का एक सर्वर है तब भारत के सभी लोगों की निजी जानकारियां उस सर्वर पर उपलब्ध होंगी यदि सर्वर को डिसेंट्रलाइज किया जाए तब सभी लोगों के पास अपना खुद का सर्वर होगा। और व्यक्ति की निजी जानकारियां केवल उसी के पास होंगी
वेब 3.0 में सभी लोगों के पास अपनी निजी जानकारी पर पूरा कंट्रोल होगा अर्थात् फेसबुक गूगल, व्हाट्सएप, यूट्यूब पर उपलब्ध आपकी निजी जानकारी पर इन कंपनियों का कोई नियंत्रण नहीं होगा बल्कि सारा कंट्रोल आपके हाथ में होगा कि आप अपने डाटा को किस के साथ शेयर करना चाहते हैं और किसके साथ नहीं।
वेब 3.0 में सभी लोगों के पास अपना खुद का सर्वर होगा और वे इन कंपनियों के सर्वर पर निर्भर नहीं करेंगे।
कहने का तात्पर्य है कि वेब 3.0 में ऐसे सर्च इंजनो व इंटरनेट नेटवर्को का निर्माण होगा जिससे जो भी इन सर्च इंजन को यूज करेगा उसके पास इसका सर्वर होगा।
इसी कारण बड़ी-बड़ी कंपनियां वेब 3.0 का विरोध कर रही है।
जैसे क्रिप्टो करेंसी ब्लॉकचेन पर आधारित है। वैसे ही वेब 3.0 भी ब्लॉकचेन पर आधारित होगी।
वेब 3.0 में सभी लोगों के पास अपना खुद का सर्वर होगा और वे इन कंपनियों के सर्वर पर निर्भर नहीं करेंगे।
कहने का तात्पर्य है कि वेब 3.0 में ऐसे सर्च इंजनो व इंटरनेट नेटवर्को का निर्माण होगा जिससे जो भी इन सर्च इंजन को यूज करेगा उसके पास इसका सर्वर होगा।
इसी कारण बड़ी-बड़ी कंपनियां वेब 3.0 का विरोध कर रही है।
जैसे क्रिप्टो करेंसी ब्लॉकचेन पर आधारित है। वैसे ही वेब 3.0 भी ब्लॉकचेन पर आधारित होगी।
ब्लॉकचेन
एक ऐसी आनलाइन टेक्नोलॉजी है जहां पर डिजिटल करेंसी व अन्य चीजों को डिजिटल फार्म में बदलकर उसका रिकॉर्ड रखा जाता है। बिटकॉइन करेंसी ब्लॉकचेन पर ही आधारित है।
इसी ब्लाकचेन टेक्नोलॉजी के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति के पास अपना खुद का सर्वर होगा। वह सर्वर उस व्यक्ति के डिवाइस पर होगा ।
इस प्रकार इन्टरनेट पर सभी लोगों का बराबर अधिकार होगा न कि किसी विशेष कम्पनी का।
इस प्रकार इन्टरनेट पर सभी लोगों का बराबर अधिकार होगा न कि किसी विशेष कम्पनी का।
आज के इस आर्टिकल में बस इतना ही हमें अपना समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद