नमस्कार दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन(ISS) क्या है? इसके बारे में जानेंगे और इससे जुड़े आपके सभी प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास करेंगे। तो आर्टिकल को अंत तक पढ़ते रहिएगा-
आइए अब जानते हैं की इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन क्या है?
आइए अब जानते हैं की इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन क्या है?
ISS (इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन) क्या है
आई एस एस की फुल फॉर्म इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन है जैसा इसके नाम से स्पष्ट है कि यह अंतरिक्ष में स्थित है यह अंतरिक्ष में रहने के लिए ऐसी जगह है जहां पर अंतरिक्ष यात्री रहते हैं यह एक मानव निर्मित घर है जिसे एक बार में नहीं बनाया गया बल्कि साल दर साल इसका निर्माण कर इसे पूरा किया गया है इसे ऑर्बिटल स्टेशन भी कहा जाता है।
इसे पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया गया है और यह किसी उपग्रह की भांति हमारी पृथ्वी के चक्कर लगाता है यह 27600 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हमारी पृथ्वी का एक चक्कर 92 मिनट में पूरा कर लेता है। यह जिस कक्षा में घूमता है उसे Low earth orbit (LEO) कहा जाता है।
अभी 2022 तक पृथ्वी की कक्षा में दो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन स्थापित है पहला -ISS तथा दूसरा चीन का Tiangong space station है।
आईएसएस हमेशा ही पृथ्वी पर गिरने की स्थिति में होता है अतः यदि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को कोई संचालित करने वाला ना हो तभी और धीरे-धीरे पृथ्वी के करीब आ जाएगा और नष्ट हो जाएगा।
आइए अब इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की स्थापना कैसे हुई इसके बारे में जानते हैं-
इसे पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया गया है और यह किसी उपग्रह की भांति हमारी पृथ्वी के चक्कर लगाता है यह 27600 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हमारी पृथ्वी का एक चक्कर 92 मिनट में पूरा कर लेता है। यह जिस कक्षा में घूमता है उसे Low earth orbit (LEO) कहा जाता है।
अभी 2022 तक पृथ्वी की कक्षा में दो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन स्थापित है पहला -ISS तथा दूसरा चीन का Tiangong space station है।
आईएसएस हमेशा ही पृथ्वी पर गिरने की स्थिति में होता है अतः यदि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को कोई संचालित करने वाला ना हो तभी और धीरे-धीरे पृथ्वी के करीब आ जाएगा और नष्ट हो जाएगा।
आइए अब इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की स्थापना कैसे हुई इसके बारे में जानते हैं-
ISS का इतिहास(History of ISS)
अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सबसे पहले साल 1973 में sky lab station की स्थापना अंतरिक्ष में की पर कुछ तकनीकी कमियों के कारण इसे नासा द्वारा पृथ्वी के समुद्र में गिरा कर नष्ट कर दिया गया । अमेरिका के लिए फिर से अंतरिक्ष में एक नये स्टेशन की स्थापना करना, इसे बनाने का खर्च वह अकेले संचालित करना आसान नहीं हो रहा था।
इसीलिए साल 1991 में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध खत्म होने के पश्चात साल 1993 में रूस ने अमेरिका के साथ मिलकर आई एस एस की स्थापना के लिए हस्ताक्षर कर दिये।
इसीलिए साल 1991 में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध खत्म होने के पश्चात साल 1993 में रूस ने अमेरिका के साथ मिलकर आई एस एस की स्थापना के लिए हस्ताक्षर कर दिये।

इस प्रकार 15 देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां NASA -, अमेरिका ,JEXA -जापान ,ROCKCOSMOS-रूस,The Canadian space agency -कनाडा तथा ESA-यूरोपीय स्पेस एजेंसी के 11 देशों ने मिलकर ISS को अंतरिक्ष में स्थापित किया। इसका निर्माण धीरे-धीरे किया गया। सर्वप्रथम रूस ने साल 1998 में अपना स्पेस शटल जयरा भेज कर अपने पहले मॉड्यूल को आई एसएस के साथ जोड़ा इसी के कुछ समय बाद नासा ने स्पेस शटल कोलंबिया से अपना दूसरा मॉडयूल आईएसएस में जोड़ा।
और 2 नवंबर 2000 को पहली बार अंतरिक्ष यात्री इसमें रहने के लिए गए तब से अभी तक इसे कभी भी खाली नहीं छोड़ा गया।
इसका निर्माण कार्य साल 2011 में पूरा हुआ।
आईएसएस में कुल 6 कमरे हैं और यह दो भागों में बटा हुआ है एक भाग में रूस तथा दूसरे भाग में अमेरिका व उसके साथ देशों के अंतरिक्ष यात्री
कार्य करते हैं एक समय में इस आईएसएस में कम से कम 6 लोग रह सकते हैं।
आइए जानते हैं कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन क्यों आवश्यक है-
और 2 नवंबर 2000 को पहली बार अंतरिक्ष यात्री इसमें रहने के लिए गए तब से अभी तक इसे कभी भी खाली नहीं छोड़ा गया।
इसका निर्माण कार्य साल 2011 में पूरा हुआ।
आईएसएस में कुल 6 कमरे हैं और यह दो भागों में बटा हुआ है एक भाग में रूस तथा दूसरे भाग में अमेरिका व उसके साथ देशों के अंतरिक्ष यात्री
कार्य करते हैं एक समय में इस आईएसएस में कम से कम 6 लोग रह सकते हैं।
आइए जानते हैं कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन क्यों आवश्यक है-
ISS की आवश्यकता क्यों है
1. अंतरिक्ष में रिसर्च व अंतरिक्ष की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए।
2. पृथ्वी से अंतरिक्ष में बार-बार जाकर जानकारी प्राप्त करना आसान नहीं रहता यह बहुत जोखिम का काम है इसीलिए आईएसएस आवश्यक है।
आइए जानते हैं कि आईएसएस में लोग कैसे रहते हैं-
आइए जानते हैं कि आईएसएस में लोग कैसे रहते हैं-
ISS में लोग कैसे रहते हैं
आईएसएस में गुरुत्वाकर्षण शून्य होता है और वहां लोग तैरकर एक जगह से दूसरी जगह पर जाते हैं।
गुरुत्वाकर्षण शून्य होने से अंतरिक्ष यात्रियों की मांसपेशियां कमजोर होने लगती है इसीलिए प्रत्येक अंतरिक्ष यात्री के लिए 2 घंटे का व्यायाम आवश्यक होता है।
प्रत्येक अंतरिक्ष यात्री केवल 6 महीने तक आईएसएस में रहता है और उसके बाद वह पृथ्वी पर वापस लौट आता है।
अंतरिक्ष यात्री को सोने के लिए खुद को स्लीपिंग बैग से बाधना होता है ताकि वह इधर-उधर उड़ ना जाए।
आईएसएस पर ऊर्जा उस पर लगे बहुत सारे सोलर पैनलों से प्राप्त की जाती है।
अभी तक 19 देशों के 240 अंतरिक्ष यात्री इस इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर जा चुके हैं जिसमें भारत से कल्पना चावला भी शामिल है।
इस इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का आकार एक फुटबॉल के मैदान जितना बड़ा है
अंतरिक्ष यात्री साल 2030 तक इस इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर रहेंगे और इसके बाद इसे समुद्र में गिरा कर नष्ट कर दिया जाएगा क्योंकि इसमें बहुत सारे वायु छिद्र बनने लगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न - Iss की लंबाई कितनी है?
उत्तर- Iss की लंबाई एक सिरे से दूसरे सिरे तक 357 फीट या 108 मीटर है।
प्रश्न -Iss का भार कितना है?
उत्तर- Iss का भार 1 मिलियन पाउंड या 453592.3 kg है।
आज के इस आर्टिकल में बस इतना ही हमें अपना समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद