नमस्कार दोस्तों आज इस आर्टिकल में भारत के राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है? इसके बारे में जानेंगे ।
भारत का राष्ट्रपति चुनाव
भारत के राष्ट्रपति पद के चुनाव की प्रक्रिया को समझना आम आदमी के लिए थोड़ा सा कठिन है पर इस आर्टिकल में हमने इस चुनाव को समझाने का पूरा प्रयास किया है तो आर्टिकल को अंत तक पढ़ते रहिएगा।
भारत के राष्ट्रपति को भारत का पहला नागरिक माना जाता है और वह एकता व अखंडता का प्रतीक भी माना जाता है।
भारत के राष्ट्रपति पद का उल्लेख संविधान के भाग 5 के आर्टिकल 52 में मिलता है।
भारत का राष्ट्रपति चुनाव अप्रत्यक्ष विधि से होता है अर्थात कहने का मतलब यह है कि इस चुनाव में भारत का आम नागरिक वोट नहीं डालता है बल्कि आम नागरिकों द्वारा चुने गए प्रतिनिधि इस चुनाव में वोट डालते हैं।
आइए सबसे पहले एक नजर इस बात पर डालते हैं कि भारत का राष्ट्रपति बनने के लिए क्या योग्यता होनी चाहिए।
भारत के राष्ट्रपति को भारत का पहला नागरिक माना जाता है और वह एकता व अखंडता का प्रतीक भी माना जाता है।
भारत के राष्ट्रपति पद का उल्लेख संविधान के भाग 5 के आर्टिकल 52 में मिलता है।
भारत का राष्ट्रपति चुनाव अप्रत्यक्ष विधि से होता है अर्थात कहने का मतलब यह है कि इस चुनाव में भारत का आम नागरिक वोट नहीं डालता है बल्कि आम नागरिकों द्वारा चुने गए प्रतिनिधि इस चुनाव में वोट डालते हैं।
आइए सबसे पहले एक नजर इस बात पर डालते हैं कि भारत का राष्ट्रपति बनने के लिए क्या योग्यता होनी चाहिए।
राष्ट्रपति बनने के लिए योग्यता
भारत का राष्ट्रपति बनने के लिए व्यक्ति के पास निम्न योग्यताओं का होना जरूरी है-
1. उसे भारत का नागरिक होना चाहिए।
2. उसकी उम्र 35 साल पूरी होनी चाहिए।
3. उसमें लोकसभा का सदस्य बनने की सारी योग्यताएं हो।
4. वह किसी सरकारी पद या गैर सरकारी पद पर कार्यरत ना हो।
5. उस व्यक्ति के राष्ट्रपति पद के नामांकन के समर्थन में 50 निर्वाचित प्रस्तावक तथा 50 निर्वाचित समर्थक हो।
आइए अब एक नजर इस बात पर डालते हैं कि राष्ट्रपति चुनाव में कौन वोट डालता है।
राष्ट्रपति चुनाव में कौन वोट डालता है
इस चुनाव में निम्न निर्वाचित सदस्य वोट डालते हैं-
1. राज्यसभा और लोकसभा के निर्वाचित सदस्य (निर्वाचित कहने से तात्पर्य है कि ऐसे सदस्य जो कि आम जनता द्वारा चुने जाते हैं)।
1. राज्यसभा और लोकसभा के निर्वाचित सदस्य (निर्वाचित कहने से तात्पर्य है कि ऐसे सदस्य जो कि आम जनता द्वारा चुने जाते हैं)।
2. सभी राज्यों के निर्वाचित विधायक।
3. सभी केंद्र शासित प्रदेशों के निर्वाचित विधायक।
इस प्रकार इन सभी सदस्यों की एक समिति बनती है जिसे निर्वाचन समिति (electoral college)कहा जाता है।
चुनाव में कौन वोट नहीं डाल सकता है
निम्न सदस्य चुनाव में वोट नहीं डालते हैं-
1. राज्यसभा और लोकसभा के मनोनीत सांसद (यह सदस्य ऐसे होते हैं जिन्हें आम जनता द्वारा नहीं चुना जाता है बल्कि राष्ट्रपति द्वारा चुना जाता है।)
2. सभी विधानसभाओं के मनोनीत विधायक तथा केंद्र शासित प्रदेशों के मनोनीत विधायक।
3. यदि किसी राज्य की विधानसभा भंग है अर्थात उस राज्य का कोई मुख्यमंत्री नहीं है तब उस स्थिति में भी उस राज्य के विधायक इस चुनाव के लिए वोट नहीं डाल सकते हैं।
1. राज्यसभा और लोकसभा के मनोनीत सांसद (यह सदस्य ऐसे होते हैं जिन्हें आम जनता द्वारा नहीं चुना जाता है बल्कि राष्ट्रपति द्वारा चुना जाता है।)
2. सभी विधानसभाओं के मनोनीत विधायक तथा केंद्र शासित प्रदेशों के मनोनीत विधायक।
3. यदि किसी राज्य की विधानसभा भंग है अर्थात उस राज्य का कोई मुख्यमंत्री नहीं है तब उस स्थिति में भी उस राज्य के विधायक इस चुनाव के लिए वोट नहीं डाल सकते हैं।
आइए अब समझते हैं कि वोटिंग कैसे होती है
1. सबसे पहले यह जानते हैं कि किसी राज्य की विधानसभा के एक विधायक के पास कितने वोट होते हैं।
इस चीज को निकालने के लिए निम्न सूत्र का प्रयोग किया जाता है-
विधायक के एक वोट की कीमत =
इस चीज को निकालने के लिए निम्न सूत्र का प्रयोग किया जाता है-
विधायक के एक वोट की कीमत =
(उस राज्य की कुल जनसंख्या/उस राज्य के कुल निर्वाचित विधायक)×1/1000
उदाहरण के तौर पर यदि किसी राज्य की जनसंख्या 1000000 है। तथा उस राज्य में विधायकों की संख्या 100 है। तब इस सूत्र के अनुसार उस राज्य के एक विधायक के पास वोटों की संख्या
= 10000000 × 1
100 1000
= 100
इस प्रकार उस राज्य के एक विधायक के पास वोटों की संख्या 100 होगी आप समझ सकते हैं कि विभिन्न राज्यों की जनसंख्या अलग-अलग होती है तो उस राज्य के एक विधायक के पास वोटों की संख्या भी भिन्न-भिन्न होगी।
2. आइए अब यह समझते हैं कि लोकसभा व राज्यसभा के प्रत्येक निर्वाचित सांसद के पास वोटों की संख्या कितनी होती है
निर्वाचित सांसद के पास वोटों की संख्या निकालने के लिए इस सूत्र का प्रयोग किया जाता है-
सांसद के एक वोट की कीमत=
(सभी राज्यों के विधायकों के पास वोटों की संख्या का कुल योग/लोकसभा व राज्यसभा के कुल सदस्यों की संख्या का योग)
उदाहरण के तौर पर सभी राज्यों के विधायकों के पास वोटो का कुल योग 10000000 है तथा राज्यसभा और लोकसभा के कुल सदस्यों की संख्या 500 है तब उसी स्थिति में एक निर्वाचित सांसद के पास वोटों की संख्या
= 10000000/500
= 20000
= 10000000/500
= 20000
इस प्रकार उस निर्वाचित सांसद के पास वोटों की संख्या 20,000 होगी।
चुनाव की प्रक्रिया किस प्रकार होती है
सभी निर्वाचित सदस्य( सभी राज्यों के निर्वाचित विधायक व दोनों सदनों के निर्वाचित सांसदों) को एक बैलट व पेन दे दी जाती है।
वोटर को राष्ट्रपति उम्मीदवारों के नाम के आगे अपनी प्राथमिकता लिखनी होती है अर्थात कहने का मतलब यह है कि वह जिस उम्मीदवार को प्रथम प्राथमिकता देता है उसके नाम के आगे 1 लिखना होता है जिस उम्मीदवार को द्वितीय प्राथमिकता देनी होती है उसके सामने 2 लिखना होता है इसी प्रकार तीसरे उम्मीदवार के लिए तीन व चौथे के लिए चार लिखना होता है। यदि वोटर द्वारा पेन का उपयोग नहीं किया जाता है तो उस वोट को अवैध ( इनवेलिड )वोट माना जाता है।
वोटर को राष्ट्रपति उम्मीदवारों के नाम के आगे अपनी प्राथमिकता लिखनी होती है अर्थात कहने का मतलब यह है कि वह जिस उम्मीदवार को प्रथम प्राथमिकता देता है उसके नाम के आगे 1 लिखना होता है जिस उम्मीदवार को द्वितीय प्राथमिकता देनी होती है उसके सामने 2 लिखना होता है इसी प्रकार तीसरे उम्मीदवार के लिए तीन व चौथे के लिए चार लिखना होता है। यदि वोटर द्वारा पेन का उपयोग नहीं किया जाता है तो उस वोट को अवैध ( इनवेलिड )वोट माना जाता है।
राष्ट्रपति उम्मीदवार को राष्ट्रपति बनने के लिए एक निश्चित वोटों की संख्या को प्राप्त करना होता है जिसे(electoral quota) निर्वाचन कोटा कहते हैं इसे निम्न प्रकार से ज्ञात किया जाता है-
Electoral quota = (कुल वैध वोटों की संख्या/2)+1 वोट
इस प्रकार किसी भी राष्ट्रपति उम्मीदवार को राष्ट्रपति बनने के लिए 50% से अधिक वोटों का समर्थन प्राप्त करना होता है यदि वह यह करता है तो वह राष्ट्रपति घोषित होता है।
तो यह थी भारत के राष्ट्रपति को चुनने की चुनाव प्रक्रिया राष्ट्रपति से संबंधित कुछ अन्य जानकारियां इस प्रकार हैं--
तो यह थी भारत के राष्ट्रपति को चुनने की चुनाव प्रक्रिया राष्ट्रपति से संबंधित कुछ अन्य जानकारियां इस प्रकार हैं--
राष्ट्रपति को उसके पद व गोपनीयता की शपथ कौन दिलाता है
भारत के राष्ट्रपति को उसके पद व गोपनीयता की शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश(cheif justice of India) के द्वारा दिलाई जाती है यदि भारत के मुख्य न्यायाधीश अनुपस्थित हैं तब उस स्थिति में सुप्रीम कोर्ट की सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश द्वारा राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई जाती है।
यदि राष्ट्रपति अनुपस्थित हो तो उसके स्थान पर कौन कार्य करता है
यदि राष्ट्रपति किसी कारणवश अनुपस्थित हो तो उनके स्थान पर उपराष्ट्रपति कार्य करते हैं यदि उपराष्ट्रपति भी अनुपस्थित हो तब भारत के मुख्य न्यायाधीश उनके स्थान पर कार्य करते हैं यदि मुख्य न्यायाधीश भी अनुपस्थित हो जब सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज राष्ट्रपति पद को संभालते हैं। और इनको भी वही सुविधाएं मिलती हैं जो कि एक राष्ट्रपति को मिलती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न(frequently asked
questions)
भारत के प्रथम राष्ट्रपति कौन थे
उत्तर-भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद थे जो कि 1952 में चुने गए।
भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति कौन थी
उत्तर -भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल थी।
कौन व्यक्ति भारत के दो बार राष्ट्रपति रहे
उत्तर-डॉ राजेंद्र प्रसाद भारत के दो बार राष्ट्रपति बने।
भारत के राष्ट्रपति की सैलरी कितनी होती है
उत्तर-भारत के राष्ट्रपति की सैलरी 2018 से पहले डेढ़ लाख रूपये होती थी पर 2018 के बाद संसद ने एक प्रस्ताव पास कर राष्ट्रपति की सैलरी 500000 प्रति माह कर दी।
भारत का राष्ट्रपति अपना इस्तीफा किसे सौंपता है
उत्तर-भारत का राष्ट्रपति अपना इस्तीफा उपराष्ट्रपति को देता है।
आज इस आर्टिकल में बस इतना ही अपना समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद
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