द्रौपदी मुर्मू कौन है?(draupadi murmu kon hai) || biography of draupadi murmu in Hindi ||

नमस्कार दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम श्रीमती द्रौपदी मुर्मू कौन है इसके बारे में जानेंगे तो आर्टिकल को अंत तक पढ़ते रहिएगा ।

द्रौपदी मुर्मू

श्रीमती मुर्मू के बारे में जानने से पहले उनके बारे में एक छोटा- सा परिचय इस प्रकार है-

द्रौपदी मुर्मू एक भारतीय पॉलिटिशियन है जोकि बीजेपी नेतृत्व वाली एनडीए गठबंधन की महिला राष्ट्रपति उम्मीदवार थी। जिनका नाम 21 जून 2022 को राष्ट्रपति उम्मीदवार पद के लिए घोषित किया गया था और उनके सामने विपक्ष (AITMC)के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा थे। द्रौपदी मुर्मू ने यह राष्ट्रपति चुनाव 50% से अधिक मतों से जीत कर वे अब भारत की 15 वीं राष्ट्रपति बन गई है।
साथ ही वे श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के बाद भारत की दूसरी महिला राष्ट्रपति व उड़ीसा से प्रथम राष्ट्रपति बनेंगी ।
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी तथा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने उन्हें उनके घर जाकर बधाई दी।
आईए द्रौपदी मुर्मू के व्यक्तिगत जीवन पर एक नजर डालते हैं।

व्यक्तिगत जीवन

द्रौपदी मुर्मू संथाल आदिवासी समुदाय से आती हैं। जो कि भारत के सबसे बड़े आदिवासी समूहों में से एक है। द्रौपदी मुर्मू का जन्म उड़ीसा के मयूरभंज जिले की बैदापोसी गांव में 20 जून 1958 को हुआ था।अभी वे 64 वर्ष की है।
इनके पिता का नाम बिरचि नारायण टुडु है।  है इनकी शादी श्याम चरण मुर्मू से हुई थी इनके दो बेटे और एक बेटी है।
द्रौपदी मुर्मू ने अपने निजी जीवन में काफी संघर्षो व दुखद घटनाओं का सामना किया है। 2009 में 25 साल की उम्र में उनके पहले बेटे की असमय मृत्यु हो गई थी इसके बाद वे डिप्रेशन में तक चली गई थी और खुद को डिप्रेशन से बाहर निकालने के लिए उन्होंने अध्यात्म व योग का सहारा लिया और वे  ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ गई। वे इस डिप्रेशन से बाहर निकल ही रही थी कि 4 साल बाद एक सड़क दुर्घटना में उनके दूसरे बेटे की भी मृत्यु हो जाती है। और इसी के एक साल बाद उनके पति श्याम चरण मुर्मू का भी देहांत हो जाता है लेकिन द्रौपदी मुर्मू ने अध्यात्म व योग का सहारा लेकर इन सब से उबरने की क्षमता हासिल की।

करियर की शुरुआत

सन् 1989 में श्रीमती मुर्मू ने उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर के रामादेवी महिला कॉलेज से स्नातक या ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत उड़ीसा के सिंचाई विभाग में एक कनिष्ठ सहायक(clerk) के तौर पर की थी इसके बाद उन्होंने ओडिशा के अरबिंदो इंटरनेशनल एजुकेशन एंड रिसर्च कॉलेज में एक असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर नौकरी हासिल की और काफी समय तक बच्चों को शिक्षा प्रदान की।
आइए अब उनके राजनीतिक जीवन पर एक नजर डालते हैं-

राजनीतिक जीवन 

श्रीमती मुर्मू ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत साल 1997 की। उन्होंने मयूरभंज जिले की राइंगपुर नगर पंचायत के वार्ड पार्षद का चुनाव निर्दलीय रूप से लड़ा और उन्होंने इस चुनाव में जीत हासिल की। द्रौपदी मुर्मू को विनम्र स्वभाव व एक जमीन से जुड़ा हुआ नेता माना जाता है।

इसके बाद भी 2000 से लेकर 2009 तक मयूरभंज जिले के राइंगपुर सीट से ही भाजपा के टिकट पर
 दो बार उड़ीसा की विधायक रही।
साथ ही वे 2000 से 2004 तक बीजू जनता दल व भाजपा गठबंधन सरकार में वाणिज्य, परिवहन, मत्स्य के बाद पशु संसाधन विभाग में मंत्री रही।

एक विधायक के तौर पर उनके बेहतरीन प्रदर्शन के कारण साल 2009 में उड़ीसा सरकार ने उन्हें राज्य के सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार नीलकंठ से भी सम्मानित किया था।
2015 में उन्हें झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनाया गया उन्होंने इस पद पर 2021 तक कार्य किया।

25 जुलाई 2022 को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद अब वे भारत की 15 वीं राष्ट्रपति के तौर पर कार्य करेंगी।

आज इस आर्टिकल में बस इतना ही हमें अपना समय देने के लिए बहुत-बहुत
 धन्यवाद

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