बफर स्टॉक क्या है ( Buffer stock kya hai )
हैलो दोस्तों, आज हम फिर हाज़िर हुए हैं एक और ज्ञानवर्धक लेख बफर स्टॉक क्या है ( What is Buffer stock ) के साथ। दोस्तों आपने buffer stock का नाम कभी न कभी जरूर सुना होगा। वहीं competitive एग्जाम की तैयारी कर रहे छात्र और स्कूल के छात्रों को बफर स्टॉक का विषय पढ़ने को जरूर मिलता है। जिसे वे आसान भाषा में जानना चाहते हैं। इसलिए आज हम buffer stock के टॉपिक पर ही चर्चा करेंगे और इसे सबसे आसान भाषा में समझने की कोशिश करेंगे।
बफर स्टॉक क्या है ( Buffer Stock kya hai )
बफर स्टॉक को आसान भाषा में समझ जाए तो इमरजेंसी के लिए खाद्य सामग्री को सुरक्षित रखना है। जहां बफर का अर्थ है – नुकसान की स्थित से बचाने वाली वस्तु, और स्टॉक का अर्थ है – भंडारण, जिनका उपयोग इमरजेंसी के वक्त किया जाता है। मतलब देश में अगर कभी आपातकालीन स्थिति जैसी समस्या आती है तो ऐसी स्थिति के लिए सरकार पहले ही खाद्य वस्तुएं जिसमें गेहूं और चावल प्रमुख है उन्हें सुरक्षित रखती है, जिसे आपातकालीन स्थिति में जनता के लिए उपयोग में लाया जा सके। आपने कभी न कभी सुखा और बाढ़ जैसी परिस्थित के बारे में जरूर सुना होगा या । ऐसी स्थिति में किसानों का खेती करना या तो संभव नहीं होता या फिर उनकी फसल बर्बाद हो जाती है, और उस क्षेत्र या देश में अनाज़ की कमी होने लगती है। इस स्थिति में वहां भुखमरी न फैले इसलिए सरकार buffer stock के भंडारण में रखी सामग्री का इस्तेमाल करती है।
बफर स्टोर का उपयोग कहां किया जाता है ( Buffer Stock ka upyog )
बफर स्टॉक को सरकार आमतौर पर अच्छी फसल होने और खाद्य पदार्थ की कीमतें कम होने पर खरीदकर उनका भंडारण कर लेती हैं। जिसका उपयोग निम्न अवस्थाओं में किया जाता है
* केंद्र सरकार द्वारा बढ़ती हुई महंगाई पर रोक लगाने के लिए बफर स्टॉक का इस्तेमाल किया जाता है।
* प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, सुखा, अकाल जैसी स्थिति से निपटने के लिए बफर स्टॉक जारी किया जाता है।
* किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य प्रदान कराना।
* सरकार द्वारा चलाई जाने वाली मिड डे मील, अंत्योदय जैसी योजना में बफर स्टॉक की खाद्य वस्तुओं का उपयोग किया जाता है।
बफर स्टॉक को बनाएं रखने में क्या चुनौतियां हैं
बफर स्टॉक भंडारण को बनाए रखने और उसे उर्पयुक्त लोगों तक पहुंचाने के लिए निम्न चुनौतियों का सामना करना पड़ता है
* भंडारण को उचित व्यवस्था न होने के कारण खाद्य वस्तुओं का खराब हो जाना।
* अव्यवस्थित रणनीति प्रणाली के कारण जनता तक बफर स्टॉक के खाद्यान्न लाभ न पहुंच पाना।
* उचित रखरखाव और सुरक्षा के अभाव के कारण भंडारण वस्तु का चोरी हो जाना।
* बिचौलियों द्वारा बीच में ही खाद्य उत्पादों का उपयोग कर लिया जाना और गरीबों को लाभ न मिल पाना।
शांता कुमार समिति
* शांता कुमार समिति ने प्रस्ताव रखते हुए कहा है की निजी क्षेत्रों को भी बफर स्टॉक करने की अनुमति प्रदान की जाए। जिससे निजी क्षेत्रों में भी खाद्य उत्पादों का भंडारण किया जा सके एवं अवश्यता पढ़ने पर उसका इस्तेमाल गरीबों और जरूरत मंद किसानों के कल्याण में लगाया जाए।
* इस कमेटी ने सरकार से मांग करते हुए कहा की वे बफर स्टॉक के लाभार्थियों की संख्या को घटाकर 67 प्रतिशत से 40 प्रतिशत तक कर दें।
* खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने के लिए भारतीय खाद्य निगम में लचीलापन होना चाहिए जिससे वह उत्पादों को खुले बाज़ार में उतार कर ला सके।
* किसानों को प्रदान किए जाने वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य सीधे तौर पर किसानों के खाते में ही दिया जाना चाहिए। जिससे बिचौलिए बीच में ही गरीब किसानों ओए हक न मार सके।
* समिति का कहना यह भी है की भारतीय खाद्य निगम केवल उन्हीं राज्यों के भीतर बफर स्टॉक में हस्तक्षेप करे जहां बफर स्टॉक की खरीद सही नहीं है। वहीं भारतीय खाद्य निगम को ऐसे राज्यों से अलग रहना चाहिए जो बफर स्टॉक में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
निष्कर्ष
उम्मीद ही हमारे द्वारे दी गई जानकारी बफर स्टॉक क्या है ( Buffer stock kya hai ) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको आज का लेख पसंद आया हो तो इसे लाइक और शेयर जरूर करें एवम कॉमेंट बॉक्स में अपनी प्रतिक्रियां लिखना भी हमें न भूलें। हम फिर हाज़िर होंगे ऐसे ही एक और ज्ञानवर्धक लेख के साथ तब तक के लिए नमस्कार दोस्तों।